ये वाक़िया सन सत्तर के क़रीब का है उस वक़्त आम इन्तिख़ाब होने वाले थे; सरकारी मुलाज़िम अफ़रा तफ़री में थे, बेइन्तेहा मसरूफ़ थे. जिन शख्स ने ये वाक़िया बयान किया है वे साहिब वजूद में भी नहीं आये थे. ये वाक़िया उनके वालिद से सरोकार रखता है. वालिद सरकारी मुलाज़िम थे, पटना शहर में गंगा नदी से कुछ ही दूर इनका घर था. उस रोज़ रात के वक़्त इनके वालिद साहिब को सरकारी वजाहत से कहीं जाना था, जीप का इंतज़ाम किया गया था. कोई रात के ग्यारह बजे होंगे, जीप आने में देर हो गयी. जहां जाना था वह जगह कोई बहुत दूर नहीं थी सो इन्होने तय किया के सायकल से हे चले जाएँ. फिर वे सायकल निकाल गंगा के किनारे किनारे अपनी मंज़िल-ए-मक्सूद की जानिब निकल पड़े. कुछ रास्ता तय करने पर इन्हें एक सनसनीखेज़ मंज़र पेश आया. वे देखते हैं के उनसे कुछ आगे एक मोहतरमा सफ़ेद साड़ी पहने रात की तन्हाई में ख़रामा ख़रामा नदी के किनारे किनारे बढ़ी चली जा रही हैं. पहले तो वह हैरान रह गए, रात के वक़्त सुनसान राह एक अकेली औरत क्या कर रही है? फिर उन्हें ख़याल आया के कहीं ये औरत ख़ुदकुशी को तो नहीं अंज़ाम देने के इरादे से निकली है! उन्होंने उस औरत को आवाज़ दे कर रोकना चाहा लेकिन उस औरत ने उनकी सदा को सिरे से नज़र अंदाज़ कर दिया. इस बात से उनका यकीन और भी पुख्ता हो गया के ज़रूर ये खातून ख़ुदकुशी के इरादे से निकली है. फ़ौरन ही उनहोंने अपनी रफ़्तार में इज़ाफा कर दिया साथ साथ उसे रुकने के लिए भी कहते रहे . हैरत तो इस बात के थी के वह रह रह कर पीछे देखती के जनाब इनके पीछे आ रहे हैं के नहीं लेकिन इसके बावजूद उन दोनों के दरमियान फासला कम ही नहीं हो रहा था. उन्होंने ने अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ.
फिर वह ख़ातून घाट पर उतर गयी, ये साहिब भी अपनी सायकल ज़मीन पर छोड़ उसके पीछे पीछे दौड़ पड़े. वह औरत थी के रुकने का नाम ही नहीं ले रही थे, मुड़ मुड़ कर पीछे भी देखती जाती. जब वह पानी में उतर गए तो उन्हें किसी ने ज़ोरों से झिंझोड़ा. वह उनकी जीप का ड्राईवर था. वे इस वक़्त क़रीब कमर तक पानी में डूब चुके थे. कह रहा था, मैं कब से आप को चीख चीख कर पुकार रहा हूँ लेकिन आप तो अपनी धुन में बढ़ते ही जा रहे थे. जब उन्होंने उस औरत का ज़िक्र किया तो वह हैरत से बोला, मुझे तो इस बियाबान में आप की सिवा कोई भी और नज़र नहीं आया. इस बात में रत्ती भर शक़ नहीं के अगर वह कुछ और देर कर देता तो यक़ीनन ही बहुत देर हो जाती. आज तक इनका कुनबा उस ड्राईवर का शुक्रगुज़ार है और उसे अपने परिवार का ही हिस्सा मनता है.