शनिवार, 7 जुलाई 2012

गढ़वाल की वनस्पति ....................


निचले हिस्सों में तो सभी मैदानी पेड़ पौधे मिल जायेंगे मसलन आम इमली अमरुद नीम वैगेरह लेकिन जिन्हें हम ख़ास तौर पर पहाड़ी वनस्पति कहेंगे वह थोडा ऊंचाई पर उपलब्ध होंगी. सबसे  व्यापक तौर पर जो वृक्ष मिलता है वह निसंदेह चीड़ है. तकरीबन पहाड़ों की निचली ऊंचाई से शुरू होकर ६-७००० फीट तक चीड़ का बोलबाला है. यह पेड़ अन्य वृक्षों के मुक़ाबले तीव्र गति से बढ़ता है. इसे पानी की अधिक मात्र दरकार है लिहाज़ा पर्यावरण के लिया इसकी अधिकता सर्वथा अनुकूल नहीं है. दूसरी समस्या इसका अत्यधिक ज्वलनशील होना है. पलक झपकते ही जंगल के जंगल स्वाह हो जाते हैं. एक वक़्त था जब चीड़ इतनी बहुतायत से नहीं मिलते थे, इनसे अधिक 'साल' के जंगल थे लेकिन मनुष्य की लालच के आगे इनकी एक नहीं चली; जलावन, निर्माण और घरेलु साज़-ओ-सामान की ज़रूरत के आगे जंगलों को अनाप सनाप काट दिया गया और इन वृक्षों की जगह चीड़ ने ले ली.
     
५००० से अधिक ऊंचाई पर देवदार का राज है. यह अद्भुद वृक्ष अपनी असमान को छूती ऊंचाई, नुकीले पत्तों का पिरामिड की तरह झुकाव के कारण बर्फीले वातावरण के सर्वथा अनुकूल हैं. लैंसडाउन से कुछ दूर तारकेश्वर एक ऎसी जगह है जहां कम ऊंचाई पर भी देवदार व्यापक तौर पर मिलते हैं. यह भी प्रकृति का अजूबा है के तारकेश्वर मंदिर के आसपास छोड कर देवदार वहाँ और कहीं भी नहीं हैं.     


इन वृक्षों के आलावा अन्य वृक्ष जो गढ़वाल में मिलते है वे हैं बलूत (oak), भोज (Birch), हल्दू, सदाबहार (Yew), शाहबलूत(Horse-Chestnut), गूलर(Cycamore), Willow , Alder इत्यादि. इन वृक्षों के अतिरिक्त तरह तरह की जड़ी बूटीयां मसलन ब्राह्मी , अश्वागंधी वैगेरह भी बहुतायत से मिलती हैं. फलों के वृक्षों का ज़िक्र किये बिना तो यह लेख अधुरा ही रहेगा, फलों में अंजीर (Fig), का-फल, बेडू, शहतूत(Mulberry), किन्गोड़ा, रसभरी(raspberry), जामुन,मुनक्का( Currants), पिंगल फल (Hazelnut), सेब, नाशपाती, चेरी, खुबानी (Apricots), Plums, Peaches, नारंगी, निम्बू, केला , अनार  और अखरोट वैगेरह ............


इन वृक्षों के चित्र जल्द ही पेश किये जायेंगे.

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