बुधवार, 25 जुलाई 2012

प्रेतों की दास्तान - १



ये वाक़िया दरअसल बडोल गाँव का नहीं है बल्के हिमाचल के किसी गाँव का है. हुआ यूँ के अभी कुछ रोज़ क़बल मुझे पुणे जाने का मौक़ा मिला, वजह सैर सपाटा ही था. पुणे में एक मोहतरमा ने ये क़िस्सा बयान किया था , जो के मैं verbatim पेश कर रहा हूँ. बात काफ़ी पुरानी है जब ये मोहतरमा एक छोटी सी बच्ची थी. इनके घर में इनसे भी छोटा भाई और मां ही थी. एक रोज़ भाई अजीब से हरकत करने लगा. वह न तो कुछ खा रहा था और न ही कुछ बोल रहा था बस एक ही जगह बुत सा बैठा था. काफ़ी कोशिश के बावजूद उसके बर्ताव में कोई भी बदलाव नहीं आया. परेशान मां मिन्नत करती रही लेकिन बंदा था के टस से मस नहीं हो रहा था. आखिर मां ने आपा खो दिया और डांटने लगी तो  लड़का यकायक ही खड़ा हो गया और अजीब आवाज़ें निकालने लगा. फिर वह किसी अनजानी आवाज़ में कुछ कहने लगा जो के कोई भी समझ नहीं पा रहा था. साफ़ दिखाई पद रहा था के लड़का किसी प्रेत के साए में पड़ गया है. माँ-बेटी हैरान परेशान सी सोच में थी के आखिर क्या किया जाए. एक पडोसी ने कहा के पास के गाँव में कोई जोगी है जो इस का इलाज़ कर सकता है. मां जोगी की चौखट पहुँच गयी, उसके वहाँ पहुँचते ही जोगी कह उठा, 'तो तुम आ ही गयी?' वह हैरान रह गयी.
जोगी उनके घर पहुंचा और लड़के से जाने क्या गुफ़्तगू  करने लगा. कुछ वक़्त बाद  वह कहने लगा. इस लड़के पर एक आठ बरस की छोटी लड़की का साया है. उस लड़की को उसकी मां ने ही क़त्ल कर दिया था. कल इस लड़के ने उस जगह जहां लड़की को क़त्ल कर दफना दिया गया था, थूक दिया था जिस वजह से उस रूह ने नाराज़ हो इस अपने बस में कर लिया है. अब तो उस लड़की का ठीक से दाह संस्कार कर उस जगह शुद्ध करना होगा. फिर उन लोगों वैसा ही किया. इसके कुछ रोज़ बाद ही लड़का अहिस्ता अहिस्ता अपनी पहले वाली हालत में आ गया.


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