सर्दियाँ आते ही रीछ हमारे इलाक़े में आ जाते हैं. वजह सीधी सी है, ऊंचाइयों पर हिमपात होने से रीछ का अपना इलाक़ा रहने लायक़ नहीं रह जाता, खाने की तलाश में में ये जानवर निचले इलाकों में आ जाते हैं और जंगलों में पनाह ले लेते हैं. चूंके इन इलाक़ों के बाशिंदे रीछ के तौर तरीक़ों से नावाकिफ़ होते हैं लिहाज़ा इनसे सामना होने पर अक्सर ही ज़ख़्मी हो जाते हैं कभी कभी तो मौत भी हो जाती है. रीछ से निपटने के कुछ आसान तरीक़े हैं जिन्हें ज़हन में रखा जाए तो रीछ से सामना होने पर कुछ मदद हो सकती है...
१. अगर रीछ दिखाई पड़ जाए तो अपनी जगह बिना हिलेडुले खड़े रहें फिर अहिस्ता अहिस्ता बिना मुड़े ही पीछे पीछे होते जाएँ.ऐसा करने से रीछ आश्वस्त हो जायेगा और अपने राह निकल जाएगा. दौड़े कभी नहीं ऐसा करने से उसकी शिकार-प्रवृति उभर आएगी और रीछ किसी भी इंसान से दो गुना तेज़ दौड़ सकता है.
२. अगर जंगल से गुज़र रहे हैं तो खाने का सामान न लेकर चलें. रीछ किलोमीटर दूर से ही खाने की गंध भांप लेता है. कहावत हैं अगर चीड का फल गिरा तो, हिरण ने उसे सुन लिया, चील ने देख लिया और रीछ ने सूँघ लिया.
३.मादा रीछ बच्चों के साथ बेहद आक्रामक होती है. जंगल से गुज़र ते वक़्त जोरों से शोर करते हुए जाएँ ताके अगर कोई रीछ वहाँ हो तो वह चौंके नहीं. रीछ को हतप्रभ होना बिलकुल भी पसंद नहीं.
सबसे बड़ी बात तो ये है के रीछ से सामना ही न हो.
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