रविवार, 1 जुलाई 2012

बडोल गाँव आखिर क्या बला है?

हमारे एक पडोसी हैं, जनाब बिस्ट साहब, पोखरा गाँव है उनका. सतपुली से एक रास्ता कुमाऊं की तरफ निकलता है और गढ़वाल की हद पर पोखरा गाँव है. अच्छी ऊंचाई है लिहाज़ा मौसम साल भर खुशगवार रहता है। मैंने कहा, अभी भी हमारे घर दो आम के दरख़्त हैं जिनमे बेशुमार आम होते हैं'. कहने लगे, आप का गाँव तो काफी नीचे है आम ऊंचाई पर नहीं लगते. बात एकदम दुरस्त है, बडोल गाँव यूँ समझ लीजिये कोटद्वार की ही ऊंचाई पर है लेकिन एक वादी में बसा है। हर तरफ गगनचुम्बी चोटियाँ मसलन चांडाखाल, चरक की डांड वगैरह. गाँव चूंके वादी की तलहटी पर है लिहाज़ा दिन के वक़्त मौसम गरम हो जाता है लेकिन रात में तापमान गिर कर खुशगवार हो जाता है।

कभी हमारा गाँव कोटद्वार दुग्ग्डा के ज़मीने रास्ते पर पड़ता था उस वक़्त की बात ही और थी. टट्टुओं का सिलसिला लगातार ज़ारी रहता था  सामान का ऊपरी बस्तियों में पहुंचाने का वही अच्छा तरीका था. इस वक़्त गाँव अपनी अहमियत खो चूका है, मुट्ठी भर घर रह गए है और वह भी वीरान हैं।......


मिताई गढ़वाली बोलणी नि आन्द . जैकू आन्द वैकु यख आपणा विचार प्रकट करण वास्ते आमंत्रण देणा छुं .

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